शुक्रवार, 25 सितंबर 2015

योग : मर्यादा की स्थापना

आत्मा अपने मौलिक स्वरूप में पूर्णतया प्रकृति से अछूती रहती है । परंतु प्रकृति के मध्य रहते, प्रकृति के गुणो का भोग करते वह मोंह आसक्ति जनित कर लेती है । यत्न द्वारा आत्मा को आच्छादित मोंह से मुक्त करना तथा इसे अपने मौलिक स्वरूप में पुनर्स्थापित करना मर्यादा की स्थापना है । योग खोई हुई मर्यादा की पुनर्स्थापना है । 

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