भगवद्गीता
सोमवार, 21 सितंबर 2015
ब्रम्हचर्य
ब्रम्हचर्य की परिभाषा करते हुये कहा गया है कि व्यक्ति के विचार में
,
बचन में व क्रिया में साथ ही प्रत्येक काल में प्रत्येक स्थान पर लैंगिक सम्भोग से वंचित रहना ब्रम्हचर्य होता है ।
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