शुक्रवार, 4 सितंबर 2015

उपलब्धि : लक्षण 3

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को, योगावस्था प्राप्त दशा के व्यक्ति के लक्षणों को बताते हुये कहे कि वह व्यक्ति "शत्रु और मित्र" के मध्य रहते हुये, उन व्यक्तियों के मध्य जो “उदासीन और निष्पक्ष हैं” रहते हुये, उन व्यक्तियों के मध्य जो “घृडित और सम्बंधित हैं” रहते हुये भी समभाव का आचरण करता है ऐसे व्यक्ति के कार्य में कोई त्रुटि नहीं होती है । उसके कार्य सदा दोष मुक्त होते हैं । 

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