गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि योगाभ्यासी व्यक्ति
को शरीर को अतिकारक स्थितियों से बचाना चाहिये यथा अधिक भोजन, अधिक निद्रा आदि । गुरू ने उपरोक्त कथन का
विलोम भी कहा कि योगाभ्यासी व्यक्ति को संयमित भोजन तथा संयमित निद्रा का जीवन
रखते नियंत्रित मस्तिष्क द्वारा कार्य का अभ्यास करने के फल से वह योग की मर्यादा
का प्रसाद पाता है । इस योग के फल से उसके समस्त संताप का निवारण हो जाता है ।
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