एक योगी प्रति पल अपने को इस परिवर्तनशील संसार के परोक्ष में
विद्यमान अपरिवर्तनीय सत्य के साथ युक्त रखता है | अपने को उससे जोडे हुये रहता है ।
इसलिये उसे इस संसार में प्रतिपल हो रहे परिवर्तनों के द्वारा किसी प्रकार का
मानसिक विक्षेप नहीं होता है ।
वह उस अपरिवर्तनीय सत्य की चिर सत्यता में स्थिर रहता है ।
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