गुरू द्वारा बताये गये योग अभ्यास विधि में केंद्रित मस्तिष्क
के लिये बल दिया गया है । इससे साधक की सम्पूर्ण ऊर्जा एक प्रयोजन विषेस के लिये
प्रयोज्य हो जाती है । एकाग्र केंद्रित मस्तिष्क से स्वच्छ निर्मल विवेक जागृत होता
है । निर्मल विवेक के फल से हम योग के अभ्यास के लिये तत्पर होते हैं । योग के साधना
द्वारा, हम प्रयोग और प्रयोग के परिणामों
पर आधारित जीवन को उच्चस्तरीय सत्य पर आधारित जीवन में उन्नति के लिये अपने को
सक्षम बनाते हैं ।
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