गुरू ने योगावस्था प्राप्त करने के लिये जिज्ञासु को समस्त
इंद्रियों, मस्तिष्क, पूर्व जीवन की स्मृतियों आदि सभी को नियंत्रित तथा अनुशासित
रखने के लिये उपदेश किया है । वास्तविकता में योग अनुशासन की स्थापना है । अनुशासन
नियंत्रण द्वारा ही स्थापित हो सकता है । इस प्रक्रिया के ठीक विपरीत प्रकृति के
प्रति मोंह आत्मा का अनियंत्रित अनुशासन विहीन आचरण होता है ।
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