गुरू ने ध्यान योग की विधि बतायी । पुन: ध्यान योग के अभ्यास
काल में सम्भावित बाधाओं तथा उन बाधाओं से बचने के उपाय बताये । लक्ष्य प्राप्ति
के दो अंग है । पहला आत्मा को उस पर आच्छादित मोंह से उबार कर उसे उसके मौलिक
स्वरूप में वापस लाना दूसरा प्रकृति जो कि अपने गुणॉं तथा आकर्षणों से युक्त रहकर
आत्मा को अपने सत्य मौलिक स्वरूप से विचलित कर उसे दूषित करने के लिये सदैव
उपस्थित रहती है से आत्मा को रक्षित रखना । सत्य का चिंतन ध्यान व उसका अनुभव पाने
के लिये एकाग्र मस्तिष्क अनिवार्य वाँक्षना होती है ।
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