रविवार, 13 सितंबर 2015

ध्यानयोग

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि एक शांत एकांत स्थान पर पवित्र आसन पर बैठकर अपने स्मृति के संचित विचारों तथा इंद्रियों को अपने पूर्ण नियंत्रण में रखते हुये अपने मस्तिष्क को एकल ब्रम्ह के ध्यान में संलग्न कर अपनी आत्मा की शुचिता के लिये योग का अभ्यास करना चाहिये। 

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