रविवार, 6 सितंबर 2015

अभ्यास विधि की व्याख्या

व्याख्याकार गुरू द्वारा बताये गये योगाभ्यास विधि का विस्तार बताते हुये कहता है कि सामान्य जीवन यापन में प्रत्येक व्यक्ति भौतिक सुखों एवं वासना वस्तुओं को प्राप्त करने एवं संचय करने के प्रयत्नों में व्यस्त रहता है । इस व्यस्तता के कारण उसका मस्तिष्क ब्रम्ह के प्रति अचेत दशा में रहता है । इसलिये गुरू उपदेश किये कि अपने विवेक को ब्रम्ह के ध्यान में केंद्रित करें । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें