रविवार, 10 मई 2015

शत्रु का परिचय

 गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन के प्रश्न के उत्तर में कहते हैं कि मनुष्य की इच्छायें और क्रोध उसके ज्ञान प्राप्ति के प्रयत्नों में शत्रु के समान आचरण करने वाले होते हैं । व्याख्याकार कहता है कि मनुष्य की प्रकृति अपनी रचना के अनुरूप रुचियों और अरुचियों के माध्यम से मनुष्य से कार्य करा लेती है । 

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