व्याख्याकार
कहता है कि अवतार पुरुष के उदाहरण से यह स्पष्ट विदित होता है कि आत्मा का अनुभव
करके आत्मा की मर्यादा के अनुकूल जीवन में और मनुष्य के आम जीवन में कोई विरोधाभास
की स्थिति नहीं होती है । अवतार के उदाहरण से यह स्पष्ट विदित होता है कि एक आम
मनुष्य कैसे उन्नति करके अवतार पुरुष के स्तर तक पहुँच सकता है । ब्रम्ह का स्वरूप
और उसकी कर्मविधि अवतार पुरुष के स्वरूप दर्शन और उसके कर्मविधा से सीखने का अवसर
हर प्रत्येक मनुष्य को मिलता है । ब्रम्ह जो कि चिर, दिव्य, और आनंद का सत्य स्वरूप होता है वह
कैसे सीता के हरण से दु:खी होकर उनके खोज़ में विह्वल दशा में दर दर भटकता है । योगेश्वर
श्रीकृष्ण सभी मनुष्य का आह्वाहन करते हैं कि मेरे ऊपर समर्पित भाव से निर्भर करो
मैं तुम्हे ब्रम्ह का ज्ञान और दर्शन कराऊँगा ।
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