सोमवार, 25 मई 2015

दिव्य जन्म और दिव्य कर्म

व्याख्याकार कहता है कि अवतार पुरुष के उदाहरण से यह स्पष्ट विदित होता है कि आत्मा का अनुभव करके आत्मा की मर्यादा के अनुकूल जीवन में और मनुष्य के आम जीवन में कोई विरोधाभास की स्थिति नहीं होती है । अवतार के उदाहरण से यह स्पष्ट विदित होता है कि एक आम मनुष्य कैसे उन्नति करके अवतार पुरुष के स्तर तक पहुँच सकता है । ब्रम्ह का स्वरूप और उसकी कर्मविधि अवतार पुरुष के स्वरूप दर्शन और उसके कर्मविधा से सीखने का अवसर हर प्रत्येक मनुष्य को मिलता है । ब्रम्ह जो कि चिर, दिव्य, और आनंद का सत्य स्वरूप होता है वह कैसे सीता के हरण से दु:खी होकर उनके खोज़ में विह्वल दशा में दर दर भटकता है । योगेश्वर श्रीकृष्ण सभी मनुष्य का आह्वाहन करते हैं कि मेरे ऊपर समर्पित भाव से निर्भर करो मैं तुम्हे ब्रम्ह का ज्ञान और दर्शन कराऊँगा । 

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