अर्जुन
ने जिज्ञासा व्यक्त किया कि विवस्वान तो आपके जन्म से पूर्व हुये थे तो कैसे आपने
उन्हें ज्ञान उपदेश दिया था । इस जिज्ञासा के उत्तर में गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण
अर्जुन से कहे कि आज से पूर्व भी मैं कई बार जन्म लिया हूँ और इस जन्म से पूर्व
अनेकों बार आपका भी जन्म हुआ है और यहाँ पर उपस्थित सभी का अनेको बार जन्म हुआ है
। मैं इन सभी जन्मों को जानता हूँ परंतु आप उन जन्मों को नहीं जानते हैं ।
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