व्याख्याकार
कहता है कि परम् ब्रम्ह एक है । समुदाय और देश की भिन्नता से मनुष्य जिसभी नाम और
रूप में उससे याचना करता है सभी की प्रार्थना स्वीकार करने वाला वह एक ही है । विष्णु
ही शिव हैं, शिव ही विष्णु हैं । विष्णु ही रूद्र हैं रूद्र ही ब्रम्हा
हैं । शैव मतावलम्बी जिस शिव की पूजा करते हैं, वेदांति जिस ब्रम्हा की पूजा करते हैं,
वह सभी स्वरूप एक ही परम् सत्य के ही हैं जो सभी की प्रार्थना स्वीकार करता है ।
सत्य एक है । सम्पूर्ण सत्य वही है । वह सत्य केवल सत्य है इसके अतिरिक्त उसका कोई
दूसरा रूप नहीं है ।
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