मंगलवार, 12 मई 2015

शत्रु का शमन

व्याख्याकार कहता है कि इच्छा पूर्ति का प्रयत्न उसकी भोग वस्तु के सेवन द्वारा कभी भी सफल नहीं होता है । उल्टे इच्छा और बढ जाती है । जिसके पास जितना ही अधिक धन है उसको उतनी ही अधिक और धन की कामना भी होती है । इच्छा का शमन इच्छा ना करने द्वारा ही सम्भव हो सकता है । हम जब तक नश्वर की कामना करेंगे तब तक मात्र कलह, त्रास, और मानसिक अशांति ही पायेंगे । 

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