गुरू
योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो भक्त मुझे जिस भी प्रकार से पाने की
चेष्टा करता है मैं उसे उसी प्रकार से मिलता हूँ । व्याख्याकार गुरु के उपरोक्त
कथन का विस्तार बताता है कि जो भक्त भगवान से कुछ भौतिक सुख पाने की कामना से विनय
करता है उसे भगवान उस भौतिक सुख की उपलब्धि कराकर उसे संतुष्ट करते हैं । जो भक्त
सच्चा ज्ञान पाने के लिये भगवान की उपासना करता है उसे भगवान आत्मज्ञान कराकर
संतुष्ट करते हैं ।
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