गुरू
योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि इच्छा इंद्रियों से प्रवेष करती है,
फिर मस्तिष्क को आच्छादित करके विवेक पर प्रभाव डालती है और अंतिम चरण में आत्मा
को आच्छादित करती है । इसलिये हे अर्जुन इसका शमन बिलकुल प्रारम्भिक अवस्था में ही
करना चाहिये ताकि यह मस्तिष्क और विवेक को दूषित ना कर सके ।
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