अर्जुन
को प्राचीन उपदेश बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से कहे
कि यह कोई नया ज्ञान नहीं है अपितु प्राचीन ज्ञान जो समय के साथ लुप्त हो गया था
उसे मैं आज तुम्हे बता रहा हूँ । व्याख्याकार बताता है कि सदैव इस उपदेश को प्रत्येक महापुरुष ने
प्राचीन कहकर ही अपने शिष्यों को दिया है । इन महापुरुषों की गणना बताते हुये वह गौतम
बुद्ध,
महाबीर,
शंकर,
रामानुज आदि का नाम बताता है । वह इस प्राचीन उपदेश को उस ज्ञान की संज्ञा प्रदान
करता है जिससे अन्य उपदेश की सत्यता परीक्षित की जाती है । यह वह ज्ञान है जिसे
सृजित नहीं किया गया है फिर भी चिर है । पूर्व में भी था, आजभी है, और समय पर्यंत रहेगा । गुरू योगेश्वर
बताये कि पुनर्स्थापना सदैव सम्भव होती है । इसके लिये ब्रम्ह के प्रति समर्पण व
निष्ठा होनी चाहिये । ब्रम्ह सदैव अपने रहस्य को प्रगट करता है । वह सभी को सुलभ
रहता है ।
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