शुक्रवार, 15 मई 2015

शत्रु का संहार

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इच्छा रूपी शत्रु के संहार का उपाय बताते हुये कहा कि आत्मबोध जो विवेक के भी परे होता है को धारणकर इस आत्मबोध के द्वारा शरीर की प्रकृति को नियंत्रित करके हे अर्जुन इच्छा रूपी शत्रु पर निर्मम प्रहार करो जिससे उसका पूर्ण संहार सम्भव होगा क्योंकि यह शत्रु अत्यधिक बलशाली होता है । 
इस उपदेश के साथ भागवद्गीता का कर्मयोग नामक तीसरा अध्याय पूर्ण हुआ |  

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